‬नामुमकिन सा मैने एक ख्वाब देखा,
उसमें तुझे मोहब्बत को निभाते देखा…!!
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सरहदें तोड़ के आ ज़ाती है किसी पंछी की तरह,
यह तेरी याद है जो बंटती नहीं मुल्कों की तरह…!!
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चलो मर जाते हें आपकी तसल्ली के लिए,
पर यह बताओ बाहो में दफन करोगे या सीने मे…!!
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कितने भी हल्दी, चंदन, शहद लगा लो,
दीदार-ए-यार के बिना निखार रुख़ से रुखसत ही रहती है…!!
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शायरी भी एक मीठा जुल्म है,
करते रहो या या फिर…पढ़ते रहो…!!

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