होती है लाखों ग़मों की दवा नींद भी मगर,
होते है कुछ ग़म ऐसे भी जो सोने नहीं देते…!!
————————————————–
रोज मिलते है लेकिन कुछ कहते सुनते नहीं,
मेरे सामने वो सिर्फ मेरी धड़कन बढ़ाने आते है…!!
————————————————–
लिख तो दू पुरी किताब, तेरी मासूमियत पर,
मगर ड़र लगता है, कि हर कोई तेरा दीवाना ना हो जाए…!!
————————————————–
ए खुदा अगर तेरे पेन की श्याही खत्म है तो मेरा लहू लेले,
मगर यू कहानिया अधूरी न लिखा कर…!!
————————————————–
तुम आओगे भी अब लौटकर तो तुम्हे क्या हासिल होगा,
जो मोहब्बत थी हमारे बीच वो फासलो में फ़ना हो गई…!!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *