हमने भी जिदंगी का कारवाँ आसान कर दिया,
जो तकलीफ देते थे, उन्हें रिहा कर दिया…!!
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ख्वाबों का क्या, वो तो टूट ही जायेंगें,
हम कैसे रहेंगे, जब अपने ही छूट जायेंगे…!!
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न जाने क्यों वे सब आजकल अजनबी से लगते हैं,
बिना  जिनके हम कभी अधूरे से लगते थे…!!
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मँज़िले बड़ी ज़िद्दी होती हैँ, हासिल कहाँ नसीब से होती हैं,
मगर वहाँ तूफान भी हार जाते हैं, जहाँ कश्तियाँ ज़िद पर होती हैँ…!!
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जहर के असरदार होने से कुछ नहीं होता साहब,
खुदा भी राजी होना चाहिये मौत देने के लिए…!!

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